Lockdown ने एक मजबूर पिता को बना दिया चोर

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कोरोना वायरस महामारी के इस लॉक डॉन में लोग काफी परेशान हैं और सबसे जो परेशानी हो रही है वह प्रवासी मजदूर और किसानों को हो रही है| आपने तो यह कहावत सुनी होगी मजबूरी इंसान से क्या नहीं करवा देती है |जिंदगी कभी-कभी ऐसे झटके देती है, जिसे इंसान ना चाहते हुए भी इंसान को करना पड़ता है|

ऐसा ही हुआ इस लॉक डॉन में मोहम्मद इकबाल के साथ मोहम्मद इकबाल इस लोक डॉन में बरेली में फंसे हुए थे| वह अपने घर बरेली से राजस्थान जाना चाहते थे उनके साथ उनका बच्चा भी है जो दिव्यांग है| मोहम्मद इकबाल पैदल तो जा सकते थे लेकिन उनका बच्चा पैदल नहीं जा सकता था| पैसे नही होने के कारण मोहम्मद इकबाल को वह करना पड़ा जो उनकी जमीर इजाजत नहीं दे रही थी|

इसके लिए मोहम्मद इकबाल ने साहब सिंह के घर से एक साइकिल चुराई| साइकिल चुराते वक्त इकबाल ने वहां पर एक पत्र छोड़ दिया| जब साहब सिंह सुबह अपने घर में की साफ सफाई कर रहे थे तभी उन्हें वह पत्र मिला उसमें लिखा था कि नमस्ते जी मैं आपकी साइकिल लेकर जा रहा हूं हो सके तो मुझे माफ कर देना जी क्योंकि मेरे पास कोई साधन नहीं है और मेरा एक बच्चा है उसके लिए मुझे ऐसा करना पड़ा क्योंकि वह विकलांग है और चल नहीं सकता है| हमें बरेली तक जाना है इसलिए मैं आपका साइकिल ले जा रहा हूं| आपका कसूरवार एक यात्री मजदूर और मजबूर| साहब सिंह को अपने साइकिल चोरी होने का गम नहीं है उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि मेरी साइकिल किसी के काम आए आई|

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