भारत के राजचिन्ह सत्यमेव जयते पर नेपाल के प्रधानमंत्री ने उठाए सवाल

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भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद और बढ़ता ही जा रहा है|आपको बता दें कि जब राजनाथ सिंह ने कैलाश मानसरोवर पर जाने वाले यात्रियों के लिए लिपुलेख में एक सड़क उद्घाटन किया तब से ही नेपाल इससे नाराज है, क्योंकि नेपाल का कहना है कि यह उसका क्षेत्र है|

नेपाल ने नया नक्शा जारी किया

जिस पर भारत ने भी अपना रास्ता साफ करते हुए जवाब दिया, लेकिन एक बार फिर से नेपाल ने काला पानी ,लिपुलेख के साथ अपने देश का एक नया नक्शा जारी कर दिया है| जिससे भारत खफा है इस पर भारत का कहना है कि भारत और नेपाल के रिश्ते अच्छे थे लेकिन नेपाल की हरकतों को देखते हुए लगता है कि हो ना हो यह किसी तीसरे देश का हाथ है और आपको पता ही है वह तीसरा देश कौन है हां वह तीसरा देश चीन ही है|

आपको बता दें कि यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है | यह और गहरा गया है क्योंकि नेपाल के प्रधानमंत्री ने एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने भारत के राजचिन्ह सत्यमेव जयते पर सवाल उठा दिया है | उन्होंने कहा कि भारत के राजचिह्न में सत्यमेव जयते लिखा हुआ है या सिंहमेव जयते|इस बयान के द्वारा नेपाल के प्रधानमंत्री यह कहना चाहते हैं कि भारत सत्य की जीत चाहता है या फिर सिंह यानी की ताकत की जीत चाहता है| इससे यह साफ पता चलता है कि वह कहना चाह रहे हैं कि भारत सत्य पर नहीं बल्कि वह ताकत दिखाकर जितना चाहता है|

नेपाल के प्रधानमंत्री ने चीन को लेकर कहा कि नेपाल सिर्फ अपने हक की मांग कर रहा है और अपने देश के लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहा है| हमने किसी के दबाव में आकर यह मुद्दा भारत के सामने नहीं उठाया है| उन्होंने आगे कहा कि काला पानी,  लिंपियाधूरा और लिपुलेख हमारा हिस्सा है और हम इसे वापस लेकर रहेंगे|नेपाल का कहना है कि भारत ने इन सभी नेपाल के क्षेत्रों में सैनिक अड्डा बना कर इसे विवादित क्षेत्र बना दिया है|

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