Coronavirus : इस नई तकनीक ने कोरोनावायरस से लड़ने के लिए जगायी आशा की किरण

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आज पूरी दुनिया कोरोनावायरस से ग्रसित है और हर कोई यही चाह रहा है कि इस वायरस से जल्द से जल्द छुटकारा मिल जाए वही कुछ वैज्ञानिक दशकों पुरानी तकनीक से कीटाणु को हवा में नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं |यह पुरानी तकनीक है और इसे अपर रूम अल्ट्रा वायलेट जर्मी साइडल इर्रेडिएशन कहते हैं।आसान भाषा में इसे कह तो सूर्य की रोशनी को अपने घर, दुकान और ऑफिस के अंदर ले जाना|इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो बिना कोई साइड इफेक्ट के कीटाणुओं को नष्ट किया जा सकता है चाहे वह बैक्टीरिया हो, फंगस हो या कोरोना वायरस|आपको बता दूं कि अभी तक इस बात को स्पष्ट नहीं किया जा सका है कि धूप से कोरोना वायरस मर जाता है|

धूप से खत्म हो जाता है कोरोना वायरस

हालांकि कुछ वैज्ञानिक यह कह रहे हैं कि धूप में बैठने से 10 मिनट धूप में बैठने से कोरोनावायरस खत्म हो जाता है|हालांकि कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि विटामिन डी की शरीर में कमी हो जाने से कोरोना वायरस का खतरा बढ़ जाता है|वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें वायरस को खत्म करने में सक्षम है, हालांकि इसे बड़े स्तर पर अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया|

इसके पीछे की प्रमुख वजह यह है कि स्कूल और कॉलेज में सिखाया जाता है कि सिखाया जाता है कि अल्ट्रावायलेट किरणें मनुष्य के लिए खतरनाक है क्योंकि यह मनुष्य की त्वचा खराब कर देती है और इसके कारण स्किन कैंसर होता है और दूसरा कारण इसका इस्तेमाल महंगा होना है , क्योंकि इस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाए तो कम से कम 75 लाख का खर्च आएगा|  हालांकि न्यूयॉर्क अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इस तकनीक का हाल ही में शुरुआत किया गया है|

इस नई तकनीक ने कोरोनावायरस से लड़ने के लिए जगायी आशा की किरण

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वायरस ठीक होने के बाद दोबारा आ रहा है| तब तक इतना समय मिल जाएगा कि इस टेक्नोलॉजी को व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया जाए |इस तकनीक में अल्ट्रावायलेट किरण को छोड़ने वाले यंत्र दीवार पर लगाए जाते हैं और साथ में सीलिंग फैन भी लगाया जाता है ताकि पंखा हवा को ऊपर खींच सकें और उस हवा में मौजूद कीटाणु अल्ट्रावॉयलेट किरणों का शिकार बन सके| वैज्ञानिकों के अनुसार अल्ट्रावायलेट किरणें फंगस के डीएनए और वायरस के आरएनए को  नष्ट कर देती है |

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